My journey to ISU

By: Karishma Inamdar, India, B.Tech in Electronics to Telecommunication, MSS15

मेरा जन्म उस वर्ष हुआ जिस वर्ष Hubble Space Telescope अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया गया था । मै मानती हुँ शायद इसी का असर हुआ और मुझे पेदाईशी अंतरिक्ष की ओढ़ लगगई । रात के समय में घर के छत पर जाकर घंटो तक आकाश में चाँद-तारों को निहारना मेरी  पसंदीदा रूचि थी । इसी ओढ़ की ओर यात्रा करते हुए मैं कई खगोलीय संघ (Astronomical club) से जुड़ी । मै हर समय बस यह प्रयास करती थी कि कहा से मुझे अंतरिक्ष का ज्ञान मिले ।

वर्ष २००३, १ फरवरी की ऐसी एक सुबह । नींद से जागने के बाद, मै दूरदर्शन पर समाचार चैनल देखने लगी । उसमे अंतरिक्ष यान ‘कोलंबिया’ के दुर्घटना का समाचार था, जिसमे सात अन्तरिक्ष यात्रीयों की मृत्यु हो गयी थी । उन्ही में से एक थी अमेरिकी-भारत अन्तरिक्ष यात्री डॉ. कल्पना चावला । मै उन्हें अपना आदर्श मानती हुँ क्योंकि उन्होनें मेरे अंतरिक्ष के सपनों को पुनः प्रज्वलित किया । जब मै बाल्यावस्था से आगे बढ़ने लगी तब मै अंतरिक्ष संवंधित अनेक महान व्यक्तित्व से मिली । उसमे से एक थे महान ब्रह्माण्ड वैज्ञानिक डॉ. जयन्त विष्णु नारलेकर । वह वास्तव में एक व्यावाहारिक व्यक्ति है । मै बचपन से ही उन्हें बहुत ही प्रश्न करती और वह हमेशा सर्वोत्कृष्ट उत्तर देने का प्रयास करते । मै अपने आपको बहुत ही भाग्यशाली मानती हुँ कि मुझे ऐसे महान व्यक्तित्व से मार्गदर्शन मिला ।

मेरा सबसे बड़ा प्रेरणा का स्रोत था मेरा घर, मेरे माता-पिता । अधिकतर मुस्लिम समाज में लड़कियों को पढ़ाया नहीं जाता । उनको सपना देखना भी दण्डनीय होता है । पर मेरे माता-पिता ने मुझे कभी किसी बात के लिये नहीं रोका । मेरे पिता की हमेशा प्रयास रहती थी कि अंतरिक्ष से संबंधित बड़ी-बड़ी व्यक्तित्व से मुझे मिलाये और उनका मार्गदर्शन ले । ऐसे ही एक दिन पिताजी ने मुझे नासा के विज्ञान शिक्षित लीना बोकिल महोदया के पास लेकर गये । उनसे बात करते हुए मुझे इंटरनेशनल स्पेस यूनिवर्सिटी(ISU) के बारे में पता चला । तब मै डिप्लोमा के द्वितीय वर्ष में थी । तब से मैंने ठान लिया की मास्टर्स करुँगी तो ISU से । मेरे B.Tech. के अंतिम वर्ष के समय मैंने ISU में आवेदन किया । अब प्रतीक्षा केवल परिमाण का था, प्रवेश समिति के परिणाम । मै प्रतिदिन mailbox देखती कि कुछ उत्तर आया है या नही । डर लगता था कि मै उस योग्य हूँ भी या नहीं । आखिर वह दिन आ ही गया जब  मुझे ISU के प्रवेश समिति का mail आया । मुझे विश्वास नहीं हों रहा था की मेरा मास्टर्स के लिए चयन हों गया है । मै बार-बार वह mail पढ़ रही थी । चयन तो हुआ ही था आंशिक छात्रवृत्ति के साथ । पाँच वर्ष का ISU का वह सपना पूरा होने जा रहा था । चयन होने के बाद भी मुझे मेरे अपनो से लड़ाई लड़नी पड़ी और उस लड़ाई में आखिरी जीत मेरी हुई और उन्होनें कहा कि “हम तुम्हे नही रोक सकते” क्योंकि “अन्तरिक्ष तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा है ” । और आखिर वह दिन आ ही गया जब मेरे कदम ISU में पड़े ।

यहाँ हर कोई अंतरिक्ष प्रेमी है । लगभग पच्चीस देशों के विद्यार्थी है, पर यहाँ सब संप्रदाय, रंग, संस्कृति यह सब भूलकर बस एक ही उत्साह के साथ काम कर रहे है और वह है अंतरिक्ष । यहाँ के प्राध्यापक करोन बहुत ही मित्रवत है और हर समय सहायता के लिए प्रस्तुत रहते है । ISU दुनिया का एक ऐसा मंच है जिससे दुनिया के  सभी अंतरिक्ष संगठनों और उद्योगों से सहयोग है । मै अपने आपको भाग्यशाली मानती हुँ कि मुझे ऐसे विश्वविद्यालय में पढ़ने का अवसर मिला है । किसी ने कहा है  “हजार मिलो की यात्रा पूरा करने के लिये तुम्हारा पहला कदम जरुरी होता है ” । मैंने मेरे यात्रा का पहला कदम ISU में रखा है और मेरी अंतरिक्ष यात्रा यहाँ से आरंभ होती है ।

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